
महराजगंज । ठूठीबारी भारत-नेपाल सीमा से सटे महत्वपूर्ण व्यावसायिक कस्बा ठूठीबारी में आज भी रोडवेज बस स्टेशन का अभाव बना हुआ है। वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों द्वारा रोडवेज बस स्टेशन की मांग किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप सरकारी रोडवेज बसों का संचालन टैक्सी स्टैंड अथवा सड़क किनारे से किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित ठूठीबारी को सोनौली के बाद दूसरा महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन नेपाल से बड़ी संख्या में सैलानी, व्यापारी और आम नागरिक खरीदारी, व्यवसाय तथा आवागमन के उद्देश्य से पहुंचते हैं। इसके अलावा ठूठीबारी और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग गोरखपुर, महराजगंज, लखनऊ सहित अन्य शहरों के लिए नियमित रूप से यात्रा करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टेशन न होने के कारण यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी और बरसात के मौसम में उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, सड़क किनारे बसों के खड़े होने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
क्षेत्रीय नागरिकों और व्यापारियों ने शासन-प्रशासन से ठूठीबारी में शीघ्र रोडवेज बस स्टेशन निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र के विकास और यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टेशन का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। बस स्टेशन बनने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ नेपाल से आने वाले यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
