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पारंपरिक लोकगीत कार्यशाला का भव्य शुभारंभ, दस दिनों तक गूंजेंगे लोक-संस्कृति के स्वर ।

महराजगंज । लक्ष्मीपुर उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बेलवा खुर्द में पारंपरिक लोकगीत कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला उत्तरप्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश तथा पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बेलवा खुर्द के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला आगामी दस दिनों तक चलेगी, जिसमें लोकगीतों की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:30 बजे मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। यह शुभ कार्य सेवानिवृत्त शिक्षक एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक इकाई लक्ष्मीपुर के पूर्व अध्यक्ष सुदामा प्रसाद चौहान तथा विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. प्रभु नाथ गुप्त द्वारा किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने लोक-सस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में डॉ. रवीन्द्र प्रताप सिंह की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति और परंपराओं की आत्मा हैं। इन्हें संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें। कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत स्वर की अधिष्ठात्री मां सरस्वती की वंदना और भक्तिमय भजनों के साथ हुई। लोकधुनों और मधुर गीतों से पूरा विद्यालय परिसर भक्तिमय और सांस्कृतिक माहौल में सराबोर हो गया। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ लोकगीतों की प्रस्तुति दी तथा प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस अवसर पर अमित अग्रहरि, शिक्षामित्र हरीराम प्रसाद, महेन्द्र कुमार दूबे सहित अनेक शिक्षक, शिक्षामित्र, अभिभावक और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं ग्रामीण क्षेत्रों की लोक कला और संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में प्रतिभागियों को विभिन्न पारंपरिक लोकगीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और लोककलाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे बच्चों और युवाओं में अपनी लोक-संस्कृति के प्रति रुचि और सम्मान विकसित हो सके।

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