
महराजगंज । प्रकाश पर्व दीवाली भारत के सबसे प्रतीक्षित त्योहारों में से एक है, जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दीपावली के पर्व पर एक महत्वपूर्ण पहलू आतिशबाजी का प्रदर्शन भी है जो रात में आकाश में जगमगाता है जो उत्सव के माहौल को और शानदार बना देता है।
हालांकि आतिशबाजी का उत्साह कुछ जोखिमों के साथ आता है। पटाखे के गलत इस्तेमाल की वजह से दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं। जिससे चोटें और सम्पति का नुकसान भी हो जाता है। ऐसे में आतिशबाजी करते समय सुरक्षा उपायों को समझना और उसे लागू करना बेहद जरूरी है।
उक्त बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीकांत शुक्ला ने दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के दौरान जन सामान्य से सावधानी बरतने के लिए अपील करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि सही तरीके से आतिशबाजी न करना खतरनाक हो सकता है। आतिशबाजी से ध्वनि और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तेज ध्वनि वाले पटाखा फोड़ने से बचें। आतिशबाजी खुली जगह पर करें।
आतिशबाजी के दौरान क्या न करें
– घरों के अंदर या सार्वजनिक मार्गों पर आतिशबाजी न करे।
– कभी भी खुद से आतिशबाजी न बनाएं ।
– शराब, ध्रूमपान या नशीली दवाओं के प्रभाव में आतिशबाजी न करें।
– बुझे हुए या बेकार पटाखों को दोबारा न जलाएं।
– आतिशबाजी को किसी कंटेनर में न जलाएं।
आतिशबाजी करते समय बरतें सावधानी:
– आतिशबाजी केवल बाहर ही जलाएं।
– आतिशबाजी जलाते समय आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें।
– एक समय में केवल एक ही पटाखा फोड़ें।
– फुलझड़ियों को शरीर से दूर रखें।
– राकेट जैसे पटाखे फोड़ते समय मोटे कपड़े पहनें।
इलाज के लिए सभी सीएचसी पीएचडी पर दो-दो बेड आरक्षित
महराजगंज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि दीपावली पर्व पर आतिशबाजी को लेकर स्वास्थ्य विभाग एलर्ट है।
उन्होंने कहा आतिशबाजी के दौरान जलने या झुलसने से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज को लेकर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर दो-दो बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में मलहम, एंटीबायोटिक,आंख और अन्य आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा दी गई है। आतिशबाजी के दौरान घायल व्यक्ति एंबुलेंस काल कर संबंधित अस्पताल पर जाकर इलाज शुरू करावें।

