महराजगंजउत्तर प्रदेश

ग्राम पंचायत नदुआ में शव दाह गृह निर्माण की उठी मांग ।

मिठौरा। ब्लाक मिठौरा के ग्राम पंचायत नदुआ के ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित शव दाह गृह निर्माण को लेकर अपनी मांग को एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया है। मंगलवार को क्षेत्र के ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र ने संबंधित अधिकारियों से मिला और शव दाह गृह निर्माण की दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए पत्र सौंपा। मालूम हो कि ग्राम पंचायत नदुआ में रहने वाले लोगों को शव दाह संस्कार के लिए दूरदराज स्थित अन्य गांवों के घाटों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में मार्ग की दुर्दशा और नजदीकी श्मशान घाट के अभाव में परिजनों को मृतक का अंतिम संस्कार कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार शव को ले जाने में घंटों का समय लग जाता है, जिससे परिजनों के साथ ही ग्रामीणों को भी भावनात्मक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए नदुआ, बसन्तपुर राजा,बरवा राजा,बागापार सहित आस-पास की बस्तियों के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र को अपनी पीड़ा से अवगत कराया। ग्रामीणों की समस्या से सहानुभूति रखते हुए मिश्र ने इस मामले में पहल की और ग्राम पंचायत की जरूरत को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखते हुए रेहाव नाले पर शव दाह गृह निर्माण को शीघ्र शुरू कराए जाने हेतु लिखित पत्र प्रेषित किया।इस दौरान दिनेश चंद्र मिश्र ने कहा मानव जीवन का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक होना चाहिए, यह हर व्यक्ति का अधिकार है। शव दाह गृह न होने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इस मुद्दे को प्राथमिकता में लेकर जल्द से जल्द शव दाह गृह निर्माण कार्य शुरू कराए। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से इस मांग को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल नदुआ बाजार ग्राम पंचायत के लिए, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को राहत देगी।
इस दौरान दिग्विजय चौहान, प्रकाश, प्रेम चंद दूबे,दिपक सिंह चौहान, मनोज पाठक,सुशिल पाठक, जनार्दन कन्नौजिया, सुदामा, सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। वही स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए शव दाह गृह के निर्माण कार्य को जल्द स्वीकृति प्रदान करेगा, ताकि भविष्य में किसी परिजन को अंतिम संस्कार के दौरान असुविधा न झेलनी पड़े।

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