बच्चों को उल्टी दस्त आए तो अस्पताल पर दिखाएं, ओआरएस का घोल पिलाएं- डॉ राजेन्द्र प्रसाद ।

महराजगंज । बदलते मौसम में नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। इसे देखते हुए सभी आशा, एएनएम, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सरकारी अस्पतालों पर ओआरएस और जिंक की व्यवस्था की गयी है। ऐसे में बच्चों को उल्टी दस्त की दिक्कत हो तो तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र पर दिखाएं और उपलब्ध सुविधा का लाभ लें । स्वास्थ्य केंद्र से मिली दवा के साथ साथ बच्चे को ओआरएस का घोल और जिंक की टेबलेट भी अवश्य देते रहें ।
उक्त जानकारी देते हुए अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसीएमओ डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि जिले में इकतीस जुलाई तक डायरिया रोको अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर घर जाकर लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक कर रहे हैं। साथ ही लक्षित लाभार्थी वाले परिवारों में ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां दे रहे हैं और उनके इस्तेमाल का तरीका भी बता रहे हैं। ओआरएस घोल और जिंक टेबलेट दस्त से बच्चों के जीवन की रक्षा करते हैं ।एसीएमओ डॉ प्रसाद ने बताया कि उल्टी दस्त डायरिया की स्थिति में बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर सरकारी अस्पताल आने के लिए दो साल तक के बच्चों को 102 नंबर एम्बुलेंस और इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए 108 नंबर एम्बुलेंस का इस्तेमाल किया जाना चाहिए । उन्होंने यह भी बताया कि अभिभावकों को भी यह ध्यान रखना है कि बच्चे को दस्त आते ही और हर दस्त के बाद ओआरएस का घोल अवश्य दें । इसके साथ ही जिंक की गोली एक चम्मच पीने के पानी अथवा मां के दूध में घोल कर लगातार 14 दिनों तक देना है। दस्त के दौरान और दस्त के बाद भी मां का दूध और पूरक आहार देना जारी रखना है । ओआरएस के एक पैकेट को एक लीटर पीने के पानी में घोल बनाकर रखना है जो समय-समय पर बच्चे की आयु के हिसाब से निर्धारित मात्रा में देना है। एसीएमओ ने बताया कि जिंक टैबलेट देने से दस्त की अवधि और तीव्रता कम होती है । यह तीन महीने तक दस्त से सुरक्षित रखता है और लंबे समय तक शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बना कर रखता है। उचित परामर्श के अनुसार जिंक की गोली मां के दूध या पानी के साथ बच्चे को देनी होती है। बच्चे को छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना है और इसके बाद दो वर्ष की आयु तक स्तनपान के साथ साथ पूरक आहार भी देते रहना है।
अभियान के लक्षित लाभार्थी*
·ऐसे परिवार जिनमें पांच साल से कम उम्र के बच्चे हों
· दस्त ग्रसित पांच साल से कम उम्र के बच्चे
· कम वजन वाले बच्चों को प्राथमिकता देना
· अति संवेदनशील एरिया जैसे स्लम, ईंट भट्टे आदि पर रहने वाले परिवारों के बच्चे
· सफाई की कमी वाली जगहें
· जिन स्थानों पर पहले डायरिया आऊटब्रेक हुआ हो वहां के बच्चे
· डायरिया के अधिक मामले वाले स्थानों के बच्चे ।


