घर बैठे मनरेगा श्रमिकों की रोजगार सेवक लगा रहे फर्जी तरीके से हाजिरी,जिम्मेदार मौन ।

परसामलिक । महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना केन्द्र सरकार की योजनाओं में से एक महत्वाकांक्षी योजना हैं । जिसमें मजदूरों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन रोजगार देने की गारंटी की योजना हैं, लेकिन नौतनवा ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की वजह से यह महत्वपूर्ण योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।नौतनवा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत शीशगढ़ में ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत शीशगढ़ में पीडब्लूडी सड़क से उत्तर राधे गुप्ता के खेत तक चकबंध पर मिट्टी कार्य हेतु 30 नवंबर से 13 दिसंबर तक मस्टररोल निकाला गया। संबंधित रोजगार सेवक मेट द्वारा ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को गुमराह करते हुए कई दिनों तक घर बैठे मनरेगा श्रमिकों की फर्जी तरीके से सैकड़ों मानव दिवस एनएनएमएस ऐप पर ऑनलाइन हाजिरी सृजित कर दिया गया। अगर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों द्वारा समय – समय पर स्थलीय निरीक्षण किया गया होता तो मनरेगा श्रमिकों के फर्जी हाजिरी की पोल खुल गई होती।ग्रामीणों की माने तो 10 दिसंबर को ही उक्त चकरोड का कार्य पूर्ण हो चुका है। जबकि मनरेगा श्रमिकों की हाजिरी 13 दिसंबर तक लगी है। संवाददाता ने 10 दिसंबर को जब स्थलीय पड़ताल की तो मौके पर आठ से दस मजदूर मौके पर मिले जबकि रोजगार सेवक मेट द्वारा 10 दिसंबर को एनएनएमएस ऐप पर पर 77 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी अपलोड की गई है। अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है जब मौके पर आंशिक मजदूर ही मौजूद थे तो आखिर किसकी शह पर घर बैठे मनरेगा श्रमिकों की इतने बड़े स्तर पर हाजिरी लगा फर्जीवाड़ा किया गया है। इतना ही नहीं रोजगार सेवक मेट द्वारा 6, 8, 12 व 13 दिसम्बर को कूट रचित तरीके से एक ही फोटो को एनएनएमएस ऐप पर अपलोड कर ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई है। मौके पर सीआईबी बोर्ड यानी डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाया गया. या यूं कह लें कि ग्रामीणों की आंखों में धूल झोंक कर मस्टरोल में फर्जी हाजिरी लगा कर श्रमिकों से बिना कार्य कराए ही सरकारी धन का बड़े पैमाने पर बंदरबाट किया गया है। यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो कईयों के चेहरे बेनकाब हो जाएंगे और मनरेगा योजना में हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा।इस बाबत खंड विकास अधिकारी अमित मिश्रा ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में है संबंधित को स्थलीय जांच के लिए निर्देशित किया जा रहा है।


