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देवदह व रामग्राम पहुँचे बौद्ध भिक्षु सुमित रत्न, हुआ भव्य स्वागत

महराजगंज लक्ष्मीपुर। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले पूज्य भिक्षु सुमित रत्न महाथेरो रविवार को लखनऊ से महराजगंज जिले के लक्ष्मीपुर के ऐतिहासिक बौद्ध स्थल देवदह व चौक बाजार के रामग्राम पहुँचे। उनके आगमन पर देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के पदाधिकारियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने गर्मजोशी के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया तथा बौद्ध परंपरा के अनुसार उनका सम्मान किया।
लक्ष्मीपुर क्षेत्र के बनरसिहा कला में स्थित देवदह स्तूप ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यही स्थान भगवान गौतम बुद्ध का ननिहाल था। इतिहास और बौद्ध परंपराओं में देवदह को शाक्य वंश से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया गया है, जहाँ से भगवान बुद्ध के मातृ पक्ष का संबंध रहा है। इसी कारण यह स्थान बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।

इसके अलावा लक्ष्मीपुर क्षेत्र के चौक बाजार के समीप जंगल में स्थित रामग्राम बौद्ध स्तूप भी अत्यंत ऐतिहासिक महत्व रखता है। बौद्ध परंपराओं के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि अवशेषों को आठ भागों में विभाजित किया गया था। मान्यता है कि उन आठ भागों में से एक भाग मूल रूप से रामग्राम स्तूप में सुरक्षित रखा गया था। यही कारण है कि यह स्थल विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
भिक्षु सुमित रत्न महाथेरो देश-विदेश में बौद्ध धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। वे लंबे समय से भगवान बुद्ध के विचारों—अहिंसा, करुणा और मानवता—का प्रचार कर रहे हैं। उनके आगमन से क्षेत्र के बौद्ध अनुयायियों और स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
अपने प्रवास के दौरान भिक्षु सुमित रत्न ने लक्ष्मीपुर क्षेत्र के प्रमुख बौद्ध स्थलों देवदह और रामग्राम का भ्रमण किया। उन्होंने इन पवित्र स्थलों पर पहुँचकर पूजा-अर्चना की और भगवान बुद्ध को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों को भगवान बुद्ध के उपदेशों पर चलने तथा शांति और सद्भाव का संदेश समाज में फैलाने का आह्वान किया।
भिक्षु सुमित रत्न महाथेरो ने इन दोनों पवित्र स्थलों के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र स्थल न केवल बौद्ध धर्म की विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेश से प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर देवदह रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचंद्र पटेल, श्रवण कुमार पटेल, डॉ एस एस पटेल, रामचन्द्र बौद्ध, महेंद्र एडवोकेट, संतोष जायसवाल, रामबेलाश, विजय पटेल, सतीश पटेल, मनोज, सन्तराम, अजय राव, रामलगन गौतम, सुग्रीव कुमार, दुर्गविजय पटेल, शिवभुजा पांडेय,रोहित गौतम, प्रह्लाद गौतम सहित अनेक श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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