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नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन सुनाई गई नारद मोह की प्रसंग कथा ।

महराजगंज । विकासखंड मिठौरा क्षेत्र के ग्राम सभा पतरेंगवा टोला अरनवा स्थित समय माता मंदिर परिसर में वर्षों की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा के छठवें दिन कथा वाचक पंडित शिव तिवारी ने श्रद्धालुओं को नारद मोह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।
कथा में बताया गया कि एक समय देवर्षि नारद ने स्वयं को विवाह योग्य मानते हुए भगवान विष्णु से ऐसा रूप प्रदान करने का अनुरोध किया, जिससे वे किसी राजकुमारी का मन जीत सकें। भगवान विष्णु ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की, किंतु माया के प्रभाव से उन्हें वानर मुख प्रदान कर दिया, जिसका आभास नारद जी को नहीं हुआ। स्वयं को अत्यंत सुंदर समझते हुए वे स्वयंवर में पहुँचे, जहाँ राजकुमारी ने उनका उपहास करते हुए उन्हें अस्वीकार कर दिया। बाद में जब नारद जी को अपनी वास्तविक स्थिति का बोध हुआ, तो उन्हें अपने अहंकार और भूल का ज्ञान हुआ। क्रोधावेश में उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया, जो आगे चलकर श्रीरामावतार की लीला से जुड़ता है। अंततः नारद जी को यह बोध हुआ कि अहंकार ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु है और माया से कोई भी अछूता नहीं है।
ग्रामवासी बाबूलाल यादव व फौजदार यादव ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सैकड़ों वर्षों से ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग से होता आ रहा है और इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा भाव से आयोजन किया गया है। कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर लल्लन भारती, गोबरी यादव,वीरेंद्र यादव, परसोतीम, गोबरी यादव, रामहरख, बाबूलाल यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

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