महर्षि वाल्मीकि का जीवन समाज का दर्पण- डॉ. राकेश
मिठौरा । वाल्मीकि का जीवन सदैव के लिए प्रेरणास्रोत संस्कार तथा सर्वोच्च सभ्यता प्रदान करने वाला है। लौकिक संस्कृत साहित्य का सूत्रपात महर्षि वाल्मीकि के द्वारा किया गया। जिस महान ग्रंथ की रचना से लोग अपने जीवन शैली को सुदृढ़ करने का प्रयास करते हैं उस महान ग्रंथ रामायण के रचयिता आदि कवि वाल्मीकि जी हैं। महर्षि वाल्मीकि का प्रारंभिक जीवन संघर्षों से पूर्ण रहा माता सरस्वती की कृपा ने उनके जीवन को आने वाले पीढ़ियों के लिए आदर्श के रूप में प्रस्तुत कर दिया। उक्त बातें दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार में वाल्मीकि जयंती के अवसर पर डॉ राकेश कुमार तिवारी ने कही। आगे उन्होंने कहा कि रामायण समाज का दर्पण है जिसके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन आता है रामायण के माध्यम से सामाजिक समरसता उन्नयन तथा सद्भाव की प्रक्रिया प्राप्त होती है। कार्यक्रम में दिलीप पांडेय तथा विवेकानंद त्रिपाठी ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये ।विद्यालय परिवार द्वारा महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का संयोजन अश्वनी तिवारी तथा संचालन विनोद कुमार विमल द्वारा किया गया। इस अवसर पर अखिलेश कुमार मिश्र आशुतोष कुमार कृष्णानंद शुक्ला शैलेश कुमार रामसुखी यादव विनोद कुमार यादव सहित समस्त अध्यापक अध्यापिका कर्मचारी तथा छात्र-छात्रा उपस्थित रहे।


