निमोनिया नहीं तो बचपन सही”28 फरवरी तक चलेगा ‘सांस’ प्रबंधन कार्यक्रम ।
महराजगंज । निमोनिया की रोकथाम और पांच वर्ष तक के बच्चों की ससमय इलाज कर मृत्यु दर में कमी लाने के लिए 15 नवम्बर से शुरू सांस एसएएएनएस सोशल अवेरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रलाइज निमोनिया सक्सेसफुली कार्यक्रम आगामी 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता व अन्य स्वास्थ्य कर्मी घर घर जाकर निमोनिया से ग्रसित बच्चों की पहचान कर इलाज और प्रबंधन पर जोर दे रहे हैं। अगर किसी बच्चे को निमोनिया नहीं है तो उसका बचपन सही है। इसके लिए जन समुदाय को ‘सास’ कार्यक्रम के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि ठंड का मौसम आ गया है निमोनिया के केस बढ़ने लगे है। जैसे जैसे ठंड बढ़ेगी तो निमोनिया के केस और बढ़ने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इसे देखते हुए निमोनिया प्रबंधन कार्यक्रम आगामी 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान लोगों को निमोनिया प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि निमोनिया फेफड़ों के संक्रमण, बैक्टीरिया, वायरस एवं फंगल संक्रमण से होता है। निमोनिया जैसी बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए बच्चों को जन्म के तुरंत बाद से छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराया जाना चाहिए। छह माह बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए। पांच वर्ष कम उम्र के बच्चों में निमोनिया मामले की शीघ्र पहचान और प्रबंधन किया जा रहा है। गंभीर निमोनिया के मामले में बच्चे को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पर ले जाने की सलाह दी जा रही है ।
सभी आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि वह गृह भ्रमण कर पांच वर्ष तक के निमोनिया ग्रस्त बच्चे को चिन्हित कर उपचार के रेफर करें। दो से 59 माह के बच्चों का प्रबंधन करें। अगर किसी बच्चे को खाॅसी और सांस लेने में कठिनाई हो तो उसे सरकारी अस्पताल की राह दिखाएं । उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक बच्चे को पीसीवी वैक्सीन से आच्छादित किया जाए। घर के अंदर और बाहर प्रदूषण पर समुदाय को जागरूक किया जाए। बच्चों का नियमित टीकाकरण जरूर कराएं. बारह प्रकार की बीमारियों से बचाव के पांच साल में सात बार टीकाकरण जरूर कराएं है।
निमोनिया होने के प्रमुख कारण:
-वजन कम होना, कुपोषण
-छह माह तक स्तनपान न होना
-घरेलू प्रदूषण
-नियमित टीकाकरण न होना।
-जन्मजात विकृतियां


