गुणवत्तापूर्ण संस्थागत प्रसव पर जोर दे एएनएम और स्टाॅफ नर्स -सीएमओ
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए दिया गया 21 दिवसीय प्रशिक्षण

कुशीनगर। सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण संस्थागत प्रसव पर प्रशिक्षित एएनएम और स्टाॅफ नर्स विशेष जोर दें। प्रशिक्षण में मिली जानकारी की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब आप लोग मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सुरक्षित और संस्थागत प्रसव कराएं। साथ हर गर्भवती को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करें।यह बातें मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ.सुरेश पटारिया ने सीएमओ कार्यालय सभागार में प्रशिक्षित एएनएम और स्टाॅफ नर्स को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने के बाद कहीं। उन्होंने प्रसव के पहले तथा प्रसव के बाद उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के बारे में विस्तार से बताया तथा जटिलताओं को दूर करने का टिप्स भी दिया। पेट की जांच करने, रक्तचाप की जांच करने, प्रसव की तीसरी अवस्था का सक्रिय प्रबंधन , सामान्य प्रसव और नवजात की उचित देखभाल करने के बारे में बताया।डिप्टी सीएमओ डाॅ.संजय गुप्ता ने गर्भवती के झटके आने तथा बेहोशी की स्थिति में भी प्रबंधन करने की जानकारी देते हुए बताया कि मरीज की स्थिति जैसे खून की कमी वाली गर्भवती व उच्च रक्तचाप वाली गर्भवती की प्रसव के दौरान जटिलता की आशंका हो तो उसको पहचानें, तत्काल प्रबंधन करें तथा उच्च सेवा वाले चिकित्सा संस्थानों को रेफर करें ताकि मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।यू़. पी. टी. एस. यू. के वरिष्ठ विशेषज्ञ डाॅ. अर्पिता भवल ने बताया कि प्रशिक्षणार्थियों को प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान तथा प्रसवोपरांत प्रसव प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने तथा प्रसव के दौरान किसी भी जटिलता की स्थिति में आकस्मिक चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था तथा आवश्यकता के अनुसार उच्च सुविधा वाले अस्पताल पर संदर्भन के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया।एएनएम और स्टाॅफ नर्स को पांच दिन का सैद्धान्तिक प्रशिक्षण तथा 16 दिन के प्रायोगिक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। सभी लोग प्रशिक्षण में मिली जानकारी के अनुसार बेहतर कार्य करें। प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों में नीतू, प्रतिभा, आरती, रीता, पूनम, अनीता, सरस्वती, सुनीता, और दुर्गावती प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।
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संस्थागत प्रसव के फायदे
– संस्थागत प्रसव सरकारी अस्पताल में ही कराएं। उसके बाद 48 घंटे वहीं रुकें।
-प्रसव के दौरान और उसके बाद मां के शरीर से अधिक रक्तस्राव होने की आशंका होती है, जिसे अस्पताल में आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
-कई नवजात शिशुओं को जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत होती है, जिसको नियंत्रित करने के लिए अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
-संस्थागत प्रसव कराने पर जननी सुरक्षा योजना का भी लाभ मिलता है।
-अस्पताल आने जाने के लिए निःशुल्क एंबुलेंस की सुविधा मिलती है।
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प्रशिक्षण में मिली विभिन्न जानकारी
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं स्टाॅफ नर्स नीतु ने बताया कि गर्भवती की प्रसव पूर्व चार जांच, पेट की जांच, रक्तचाप की जांच, सामान्य प्रसव, नवजात की उचित देखभाल और प्रसव के तीसरी अवस्था के सक्रिय प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गयी है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलता की स्थिति में संदर्भन के बारे में भी बता गया।


